महिला सशक्तिकरण Essay on Women Empowerment – English & Hindi

महिला सशक्तिकरण: क्या आप जानते हैं की महिला सशक्तिकरण होता क्या है तो चलिये इसको आसान भाषा मे समझते हैं इसका असली उदेश्य महिलाओ को सशक्त बनाना है ताकि वो हमारे साथ चल सके कोई भेदभाव न हो हमारे समाज मे भी उनका उतना ही हक हो जितना की हम पुरुषो का। हर महिला को पुरुषो के साथ कंधे से कंधा मिलकर और सर उठाकर चलना ही इसका असली उद्देस्य है महिला सशक्तिकरण का असली लक्ष्य ये है ताकि महिलाओ को उनका हक मिल पाये जिसके वे काबिल हैं।

भारत भी जल्द ही दुनिया का तीसरा अर्थव्यवसता वाला देश बनने जा रहा है जल्द है तो भारत मे बहुत सारे छीजो मे बदलाव करने की जरूरत है कुछ चीजों को हमे बढ़ावा देना होगा जिसमे से एक महिला सशक्तिकरण है। भारत को संशक्रिटिक पहलू पर भी बहुत ध्यान देना पड़ेगा। महिलाओ को अपने छेत्र मे खुद के आगे ले जाने की जरूरत है हलाकी Kofi Anan का कहना है, “महिलाओं के सशक्तीकरण से ज्यादा प्रभावी विकास का कोई भी साधन नहीं है।”

Women Empowerment: Do you know what women empowerment is, then let’s understand it in easy language, its real purpose is to empower women so that they can walk with us, there should be no discrimination in our society as much as we do Of men. The real objective of every woman is to walk shoulder to shoulder with men and raise their head, the real goal of women empowerment is so that women can get the right that they deserve.

India is also going to be the third economy country in the world soon. So there is a lot of change that needs to be done in India, some things will have to be promoted, one of which is women empowerment. India will also have to pay a lot of attention to the skeptical aspect. Women need to be taken forward in their own areas, says Kofi Anan, “There is no more effective development tool than empowerment of women.”

ये भी पढे: महा शिवरात्रि क्या है? महाशिवरात्री का महत्व

महिला सशक्तिकरण In Hindi

भारत मे महिलाओ की जनसंख्या Mahila sashaktikaran in essay in english

48 प्रतिशत जंशक्य महिलाओ की है देखा जाए तो 1000 पुरुषो के लिए 930 महिलाए जो की इनकी संख्या कम है। भारत के राज्यों में, केरेला में सबसे अधिक लिंगानुपात है, जबकि हरियाणा में सबसे कम है। हालांकि रिपोर्टों में कहा गया है कि इस साल हरियाणा में सुधार देखा गया है। और केंद्र शासित प्रदेशों में पुडुचेरी में लिंगानुपात सबसे अधिक है जबकि दमन दीव सबसे कम है।

Female population in India

If 48 percent of women are seen, 930 women for 1000 men, which is less in number. Among the states of India, Kerala has the highest sex ratio, while Haryana has the lowest. However, reports said that Haryana has seen improvement this year. And among the union territories, Puducherry has the highest sex ratio while Daman Diu is the lowest.

भारत में महिलाओं से संबंधित समस्याएं

भारत मे महिलाओ स्थिति आची नहीं थी पहले से बहुत बेहतर हुई है हलाकी अभी भी गाँव के इलाको मे देखा जाए तो महिलाओ को उतनी छूट नहीं दी जाती जितनी की पुरुषो को। भारत मे महिलाओ की प्रति कुछ लोगो की सोच बहुत ही गलत है कुछ लोग मानते हियन की महिला कम कुशल और द्वितीय लिंग है इस वजह से समझ मे उनकी वो पहचान नहीं बन पति जो पुरुष बनाते थे। इनकी जल्द ही शादी करवा दी जाती थी ज्यादा पढ़ाया नहीं जाता था। कन्या भूर्ण हत्या, बल विवाह , उन्हे घर से बाहर कदम रखने नहीं देता था और वो चार दिवारी मे ही रह जाती थी। ये सूची कभी खत्म नहीं होती थी।

Problems related to women in India

The situation of women was not good in India, it has been much better than before, but if we still look in the areas of the village, then women are not given as much relaxation as men. Some people have very wrong thinking towards women in India. Some people believe that Hion’s women are less skilled and have a second gender, because of this they do not understand the identity of their husbands who were men. They were soon married and were not taught much. Female murder, force marriage,She was not allowed to step outside the house and she used to stay in the four walls. This list was never ending.

महिला सशक्तिकरण क्यो और कैसे जरूरी है?

महिला सशकटिकरण एक बहुत ही आवस्यक विवाद है जिसपे सबको गौर करने की जरूरत है। सरकार या हमारी जेनेरेशन को इसके ऊपर विचार करने की बहुत जरूरत है। किसी न किसी को पहले अपनी आवाज़ उथनी ही पड़ेगी तभी कोई उसके साथ चलेगा। महिला सशकटिकरण का मुख्य मकसद महिलाओ को आत्मनिर्भर बनाना सामाजिक और आर्थिक रूप से एक ही सम्मान मिलना चाहिए

वेतन मे अंतर भी एक आवस्यक मुद्दा है भारत मे महिलाए केवल 62% कमाती है और उनके पति उनही कामो को कर रहे हैं बस जरूरत है तो कसी न किसी को क्रांति लाने की।

Why and why women empowerment is important?

Women’s empowerment is a very urgent controversy that needs to be taken into consideration. There is a great need for the government or our generation to consider it. Somebody will have to make his voice cry at first, only then someone will go with him. The main objective of women’s empowerment is to make women self-reliant socially and economically should get the same honor

The difference in salary is also an essential issue, women in India earn only 62% and their husbands are doing the same work, if there is a need, to bring revolution to someone else.

.

महिला सशक्तिकरण In English essay

भारत सरकार का सहयोग महिला सशक्तिकरण कानून

भारत सरकार ने इस मामले मे अपना बहुत योगदान दिया है और बेटी पढाओ, बेटी बचाओ और चलन, वन-स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, नारी शक्ति पुरुष, महिला-ए-हाट, आदि जैसी कई योजनाएं बनाए है जिससे काफी ज्यादा प्रभाओ पड़ा है। देखा जाए तो 2014-2020 मे काफी ज्यादा बदलाव आ गया है इसमे भारत सरकार का बहुत ज्यादा योगदान था। भारत सरकार ने इस्लामिक महिलाओ के तीन तलाक जैसी बड़ी मुद्दो को हटाया है। ताकि महिलाओ के ऊपर अत्याचार न हो सके।

Government of India Cooperation Women Empowerment Act

The Government of India has contributed a lot in this matter and has made many schemes like Beti Padhao, Beti Bachao and Chalan, One-Stop Center, Mahila Helpline, Nari Shakti Purusha, Mahila-e-Haat, etc. which have greatly affected . If seen, there has been a lot of change in 2014-2020.

महिलाओ की सबसे बड़ी बाधाये

देखा जाए तो महिला सशक्तिकरण मे महिलाओ के बित्च बहुत बाधाये आई जैसे की बाल विवाह, कार्यछेत्र मे सारीरिक शोसन, लेंगीक भेदभाव, अशिक्षा इत्यादि

1) सामाजिक मापदंड

पुरानी और रुढ़ीवादी विचारधाराओं के कारण भारत के कई सारे क्षेत्रों में महिलाओं के घर छोड़ने पर पाबंदी होती है। इस तरह के क्षेत्रों में महिलाओं को शिक्षा या फिर रोजगार के लिए घर से बाहर जाने के लिए आजादी नही होती है। इस तरह के वातावरण में रहने के कारण महिलाएं खुद को पुरुषों से कमतर समझने लगती है और अपने वर्तमान सामाजिक और आर्थिक दशा को बदलने में नाकाम साबित होती है।

1) social criteria

Due to old and orthodox ideologies, many areas of India are prohibited from leaving their homes. In such areas, women do not have the freedom to go out of the house for education or employment. Living in such an environment, women find themselves inferior to men and fail to change their current social and economic condition.

2) कार्यक्षेत्र में शारीरिक शोषण

कार्यक्षेत्र में होने वाला शोषण भी महिला सशक्तिकरण में एक बड़ी बाधा है। नीजी क्षेत्र जैसे कि सेवा उद्योग, साफ्टवेयर उद्योग, शैक्षिक संस्थाएं और अस्पताल इस समस्या से सबसे ज्यादे प्रभावित होते है। यह समाज में पुरुष प्रधनता के वर्चस्व के कारण महिलाओं के लिए और भी समस्याएं उत्पन्न करता है। पिछले कुछ समय में कार्यक्षेत्रों में महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़ने में काफी तेजी से वृद्धि हुई है और पिछले कुछ दशकों में लगभग 170 प्रतिशत वृद्धि देखने को मिली है।

2) Physical abuse in the workplace

Exploitation in the workplace is also a major obstacle in women’s empowerment. Private sectors such as service industries, software industries, educational institutions and hospitals are the most affected by this problem. This creates more problems for women due to the dominance of male prominence in society. In the recent past, there has been a rapid increase in harassment of women in the field of work and there has been an increase of about 170 percent in the last few decades.

3) लैंगिग भेदभाव

भारत में अभी भी कार्यस्थलों महिलाओं के साथ लैंगिग स्तर पर काफी भेदभाव किया जाता है। कई सारे क्षेत्रों में तो महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के लिए बाहर जाने की भी इजाजत नही होती है। इसके साथ ही उन्हें आजादीपूर्वक कार्य करने या परिवार से जुड़े फैलसे लेने की भी आजादी नही होती है और उन्हें सदैव हर कार्य में पुरुषों के अपेक्षा कमतर ही माना जाता है। इस प्रकार के भेदभावों के कारण महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक दशा बिगड़ जाती है और इसके साथ ही यह महिला सशक्तिकरण के लक्ष्य को भी बुरे तरह से प्रभावित करता है।

3) Langig discrimination

In India, women are still discriminated against at workplace level. In many areas, women are not even allowed to go out for education and employment. At the same time, they do not have the freedom to work freely or to take the family-related fallacies and are always considered inferior to men in every task. Due to such discrimination, the social and economic condition of women worsens and along with this women.

4) भुगतान में असमानता

भारत में महिलाओं को अपने पुरुष समकक्षों के अपेक्षा कम भुगतान किया जाता है और असंगठित क्षेत्रो में यह समस्या और भी ज्यादे दयनीय है, खासतौर से दिहाड़ी मजदूरी वाले जगहों पर तो यह सबसे बदतर है। समान कार्य को समान समय तक करने के बावजूद भी महिलाओं को पुरुषों के अपेक्षा काफी कम भुगतान किया जाता है और इस तरह के कार्य महिलाओं और पुरुषों के मध्य के शक्ति असमानता को प्रदर्शित करते है। संगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को अपने पुरुष समकक्षों के तरह समान अनुभव और योग्यता होने के बावजूद पुरुषों के अपेक्षा कम भुगतान किया जाता है।

4) Inequality in Payments

Women in India are paid less than their male counterparts, and the problem is even worse in unorganized sectors, especially in places with daily wages. Despite doing the same amount of work for the same amount of time, women are paid far less than men, and such work shows the power disparity between women and men. Women working in organized sector have the same experience as their male counterparts

5) अशिक्षा

महिलाओं में अशिक्षा और बीच में पढ़ाई छोड़ने जैसी समस्याएं भी महिला सशक्तिकरण में काफी बड़ी बाधाएं है। वैसे तो शहरी क्षेत्रों में लड़किया शिक्षा के मामले में लड़को के बराबर है पर ग्रामीण क्षेत्रों में इस मामले वह काफी पीछे हैं। भारत में महिला शिक्षा दर 64.6 प्रतिशत है जबकि पुरुषों की शिक्षा दर 80.9 प्रतिशत है। काफी सारी ग्रामीण लड़कियां जो स्कूल जाती भी हैं, उनकी पढ़ाई भी बीच में ही छूट जाती है और वह दसवीं कक्षा भी नही पास कर पाती है।

5) illiteracy

Problems such as illiteracy among women and skipping studies in between are also major hurdles in women’s empowerment. Although in urban areas, girls are equal to boys in terms of education, but in rural areas they are far behind in this case. The female education rate in India is 64.6 percent while the education rate of men is 80.9 percent. Many rural girls who go to school also miss their studies and they are not able to pass even the tenth standard.

6) बाल विवाह

हालांकि पिछलें कुछ दशकों सरकार द्वारा लिए गये प्रभावी फैसलों द्वारा भारत में बाल विवाह जैसी कुरीति को काफी हद तक कम कर दिया गया है लेकिन 2018 में यूनिसेफ के एक रिपोर्ट द्वारा पता चलता है, कि भारत में अब भी हर वर्ष लगभग 15 लाख लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले ही कर दी जाती है, जल्द शादी हो जाने के कारण महिलाओं का विकास रुक जाता है और वह शारीरिक तथा मानसिक रुप से व्यस्क नही हो पाती है।

6) Child Marriage

Although in the last few decades, effective decisions taken by the government have reduced the prevalence of child marriage in India to a great extent, but in 2018 a UNICEF report shows that India still has about 1.5 million girls every year. Marriage is done before the age of 18, due to early marriage, the development of women stops and she is not able to become physically and mentally mature.

 

Leave a Reply