मशीनी अधिगम क्या है – Machine Learning System

मशीनी अधिगम : क्या आपलोगो को पता है की आज दुनिया मे याइसे भी मशीने या सॉफ्टवेयर है जो खुद से ही सीखकर कम करते हैं? जी हा आपने सही सुना है यह सच है की आज के समय मे याइसे अनेक प्रणालिया हैं जो एक निश्चित डाटा के आधार पर खुद ही सीखती हैं और अपने रास्ते खुद ही तय करने की छमता रखती हैं इस तरह के प्रणालिओ को मशीनी अधिगम (Machine Learning System) कहते हैं

इस तरह के मशीनों मे याइसे एल्गॉरिथ्म होते हैं जो पहले डाटा के अनुश्र काम करना या सीखना सुरू करते हैं। और बाद मे उसी को अनुभव की तरह अपने कामो को हल करने मे लगते हैं जो बिलकुल उन्हे पहली बार मिला हो। कुछ दिये गए डाटा के अनुश्र मशीनों द्वारा खुद से सीखने की इस प्रणाली को ही हम मशीनी अधिगम ( Machine Learning) कहते हैं। तो चलिये आपको विस्तार पूर्वक बताने की कोसिस करते हैं की मशीनी अधिगम क्या होता है

मशीनी अधिगम

मशीनी अधिगम का शाब्दिक अर्थ देखा जाए तो मशीन के द्वारा सीखना या फिर मशीन द्वारा खुद से सीखने की विधि को ही मशीनी अधिगम कहा जाता है। मशीनी अधिगम वह क्रिया है है मशीनों के द्वारा कुछ सीमित नियमो और दायरों के अंतरगर्त  उदाहरण के आधार पर मशीनों को नए पर्यावरण मे काम करने के अनुकूल बनाया जाता है इस कार्य को पूर्ण करने के लिए मशीनों के लिए लिखे गए अलगोरिथम को मशीनी अधिगम अलगोरिथम कहते हैं।

1950 के समय काल से ही इस दिशा मे प्रयास आरंभ हो चुके थे। मशीनी अधिगम शब्द का प्रयोग सबसे पहले आर्थर सेम्यूल ने सन 1959 मे किया था जो IBM के General Research and Development मे प्रकाशित किया गया था।  उसके बाद जैसे जैसे कम्प्युटर मे कम करने और डाटा को संग्रह करने की छमता का बिकास हुआ वैसे वैसे मशीनी अधिगम प्रणाली मे विकास देखा गया।

जिस प्रकार हम अपने जीवन मे नए नए कार्यो को करते हैं अरु अनुभव मिलता है हम किसी भी काम को जितनी बार करते हैं हर बार कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता है इस सीखने की प्रक्रिया को ही हम अनुभव कहते हैं। हर बार कम करने से अनुभव होता है और इससे हमारा performance पढ़ता है यही बात मशीनों पर भी लागू होती है इसको निम्न वर्गो मे व्यक्त किया गया है

Machine Learn Experince ‘E’ with the task ‘T’  and improve performance ‘P’

इसके लिए मशीनों को कई चरणो मे डाटा के आधार पर प्रशिछड़ दिया गया है । इनचरणो को प्रसिछन चरणकहते हैं। यहबिलकुलवैसा ही है जैसा हमें कुछ नया सिखाने से पहले उसके बारे में बताया जाता है। हम गणित में सूत्र सीखते हैं और उनके ही आधार पर हम उन प्रश्नो का हल निकलते हैं। उन प्रश्नो से मिले अनुभव के आधार पर हम नये प्रश्नो का हल करते हैं। इसी क्रिया के आधार पर मशीनी अधिनियम प्रणालिया काम करती हैं। एक “सामान्य सिस्टम” में ये जरूरी अंग होते हैं :- इनपुट, प्रोसेस और आउटपुट।

लेकिन एक मशीनी अधिगम प्रणाली की क्रिया इससे थोड़ी अलग होती है ये प्राणली इनपुट और आउटपुट दोनों को अनुभव को लिए होती है। इसके बीच में “लर्निंग एल्गोरिदम” होता हैं जो इनपुट और आउटपुट डाटा के आधार पर नई समस्याओं को हल करने की तकनीकें प्राप्त करते हैं । उदाहरण के  लिए हम ऐसे प्रोग्राम की कल्पना कर सकते हैं जिसे किसी परिछा में “उत्तीर्णांक” न पता हो और वह अंकपत्रों के आधार पर सीख रहा हो । वो प्रोग्राम कैसे काम करेगा?

पहले अंकपत्र में 20 अंको पर अनुतृण प्राप्त हुआ । इससे प्रोग्राम जान गया की 20 और इससे कम मिलने का मतलब अनितीर्ण है । इसके बाद दूसरे अंकपत्र में 80 अंको से पास दिखा । अबजन प्रोग्राम जन गया हैं की 80 और इससे जादा आने का मतलब “पास” होना है । इसी प्रकार 100-1000 अंकपत्रों में ”39 अंको पर “फ़ेल”, ’40 अंको पर “पास” का डाटा मिल जाता है । इस प्रक्रिया में हर बार प्रोग्राम नये नियम छोडकर पुराने नियम लेगा और इस तरह असली रिज़ल्ट पर पहुच जाएगा । इस तरह बड़े डाटा पर सीख कर मशीनी अधिगम प्रणालिया काम करती हैं । डाटा के आधार पर सीखने की अपनी ही सीमाएं हैं । बहुत बार गलत सीखने की संभावना बनी रहती हैं । इसलिए मशीनी अधिगम प्रणाली का मूल्यांकन करना आवश्यक है । मशीनी अधिगम प्रणालियों की विकास प्रक्रिया में प्रशिछन चरण (training phases) के मूल्यांकन चरण (evaluation phase) होता है । इसमे मशीन की छमता ऐवम गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाता है

मशीनी अधिगम के प्रकार

मशीनी अधिगम प्रणाली को मिलने वाले इनपुट के आधार पर इसे मुखयतः दो भागों के आधार पर बाटा गया है :-

  • प्रवेछित अधिगम (Supervised learning)

इसमे प्रणाली को प्रवेछक द्वारा उदाहरण इनपुट और इच्छित आउटपुट दिये जाते हैं । इस प्रशिछन चरण मे पुनर्निर्धारित डाटा दिया जाता है जिसे लेबलीकृत (lebeled data )कहते हैं इस डाटा में इनपुट ऑब्जेक्ट और उसके आउटपुट मूल्य दोनों दिये जाते हैं । (नोट:-आउटपुट मूल्य को सुपरवाइजरी सिंगनल भी कहा जाता है ) इनपुट और आउटपुट की मैपिंग के आधार पर प्रणाली अधिगम नियमो को सीखती है और प्रत्येक प्रशिछन डाटा के आधार पर एक अनुमानित प्रकार्य प्रदान करती है । जिसकी कई विधियाँ हैं जिनमे से तीन अधिक प्रशिद्ध हैं –

  1. अर्घ-निर्देशित अधिगम (Semi-supervised learning) : इसमें प्रशिक्षण चरण में कुछ डाटा लेबलीकृत डाटा होता है और कुछ अलेबलीकृत डाटा होता है।
  2. गतिशील अधिगम (Active learning) : इसमें मशीन काम करते हुए बीच-बीच में मानव प्रयोक्ताओं से पृच्छाओं (queries) के माध्यम से सीखती रहती है।
  3. पुनरसंबलन अधिगम (Reinforcement learning) : इसके अंतर्गत प्रोग्राम को इस तरह से डिजाइन
    किया जाता है कि जब जब समस्या आती है तब उसी समय वह आई हुई समस्या के अनुसार कदम उठाता है।

अपर्यवेक्षित अधिगम (Unsupervised learning)

इसमें प्रोग्राम को कोई लेबलीकृत इनपुट नहीं दिया जाता। यह अलेबलीकृत डाटा में छुपी हुई संरचनाओं के आधार पर ही आउटपुट प्रदान करता है। ऐसी प्रणालियों का मूल्यांकन भी अपेक्षाकृत कठिन होता है।

मशीनी अधिगम के अनुप्रयोग क्षेत्र

आज कंप्यूटर से जुड़े अनेक क्षेत्रों में मशीनी अधिगम तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। इनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं-

गेम डिजाइनिंग : आज हम कंप्यूटर या मोबाइल में जो भी ऐसे गेम खेलते हैं जिनमें कंप्यूटर को भी अपनी ओर से कदम उठाना हो, जैसे- क्रिकेट, शतरंज आदि तो उनमें कौन-सी चालें चलेगा, इसकी डिजाइनिंग में मशीनी अधिगम बहुत अधिक प्रयोग होता है।

प्रकाशिक अक्षर अभिज्ञान (OCR) : टाइप किए हुए या लिखे हुए अक्षरों की पहचान का कार्य प्रकाशिक अक्षर अभिज्ञान ‘ (Optical Character Recognition) कहलाता है। इसके लिए भी मशीनी अधिगम तकनीकों का प्रयोग किया जाता है।

श्रेणीकरण प्रणाली (Ranking System) : उपयोगिता या उद्देश्य विशेष के अनुसार विभिन्न चीजों को क्रम से रखना श्रेणीकरण है। इसमें भी मशीनी अधिगम तकनीकें काम आती हैं। यह मुख्य रूप से खोज इंजन (Search Engine) से जुड़ा पक्ष है।

उदाहरण के लिए आप गूगल में’ हिंदी गीत ‘ टाइप करके सर्च बटन को क्लिक करते हैं तो 50 लाख से अधिक परिणाम आते हैं। अब इनमें पहले, दूसरे, तीसरे अथवा अंतिम स्थान पर किन परिणामों को रखा जाए, इसके निर्धारण में मशीनी अधिगम तकनीकें उपयोगी होती हैं।

स्वचलित कार (Automatic Cars) : गूगल और अन्य कई कंपनियों द्वारा स्वचलित कारों का तेजी से विकास किया जाता है। इनमें आगे और पीछे कैमरे लगे रहते हैं और उनसे मिलने वाली तस्वीरों का बहुत तेजी से विश्लेषण कार में लगे एक कंप्यूटर द्वारा किया जाता है। उन्हीं के आधार पर कार अपने परिवेश का अनुमान लगाती है और आगे बढ़ती है या निर्णय लेती है। इसमें मशीनी अधिगम तकनीक ही काम आती.

रोबोटिक्स (Robotics) : आज जीवन के अनेक क्षेत्रों में रोबोटों का भिन्न-भिन्न प्रकार से प्रयोग किया जा रहा है औद्योगिक संस्थानों से लेकर अन्य ग्रहों उपग्रहों अन्वेषण में रोबोटों की महती भूमिका है। इनमें परिवेश के आधार पर निर्णय लेने के लिए मशीनी अधिगम तकनीकें आधारभूत रूप से कार्य करती हैं।

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