20+ Lal Bahadur Shastri Quotes In Hindi सुविचार

Lal Bahadur Shastri Poem Kavita, Lal Bahadur Shastri Quotes in Hindi  Poem on Lal Bahadur Shastri in Hindi Lal Bahadur Shastri Ji Par Kavita लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2020: हम आज इस पोस्ट मे lal bahadur shastri quotes in hindi सुविचार लेकर आए है जिससे आप पढ़ कर प्रभावित हो सकते। लाल बहादुर शास्त्री एक महान नेताओ मे से एक मे आते हैं इनहोने बहुत सारी कविताए लिखी है और उनके कुछ सुविचार भी है जो हम आजके इस पोस्ट मे आपको बताने वाले हैं

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लाल बहादुर सास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय उत्तरप्रदेश के सामान्य वर्ग परिवार मे हुआ था। उनका वास्तविक नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था  उनके पिताजी एक सिक्षक थे जिंका नाम शारदा प्रशाद था। उन्होने भारत सरकार के लिए कलर्क के रूप मे अपना योगदान दिया था।  लाल बहादुर शास्त्री हरिश्चंद्र उच्च विद्यालय मे अपनी पढाई की थी

स्वतंत्रता के बाद लाल बहादुर शास्त्री जी को उत्तर प्रदेश सरकार में श्री गोविंद बल्लभ पंत के मुख्यमंत्री रहते हुए इन्हें पुलिस एवं परिवहन मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इन्होंने अपने कार्यकाल में लाठीचार्ज की जगह पानी की बौछार का उपयोग करने का निर्णय लिया। इनका मानना था कि अपने ही देशवासियों के प्रति लाठीचार्ज का इस्तेमाल बहुत ही निंदनीय कार्य है, अंग्रेजों की गुलामी के समय भी देशवासियों पर लाठियां बरसाई गई और अब जब कि देश स्वतंत्र हो चुका है तब भी लाठीचार्ज का उपयोग उसी गुलामी की याद दिलाएगा। इसलिए इनके द्वारा पानी की बौछार का उपयोग करने का निर्णय लिया गया। इनके इस उपयोग की काफी सराहना हुई।

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में जब इन्हें रेल मंत्री बनाया गया तब देश में हुई एक रेल दुर्घटना में बहुत जान माल का नुकसान हुआ, जिसकी जिम्मेदारी स्वयं अपने ऊपर लेते हुए रेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। तब प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए संसद में कहा कि मैं सिर्फ इसलिए यह इस्तीफा स्वीकार नहीं कर रहा हूं कि लाल बहादुर शास्त्री जी इस घटना के जिम्मेदार हैं, बल्कि यह इस्तीफा इसलिए स्वीकार कर रहा हूं क्योंकि इससे संवैधानिक मर्यादा में एक मिसाल कायम होगी हम राजनेताओं की जनता के प्रति एक जवाबदेही होगी।
तब संसद में लाल बहादुर शास्त्री जी के इस कार्य की बहुत प्रशंसा हुई थी।

सन् 1962 में प्रधानमंत्री जवाहलाल नेहरू के कार्यकाल में भारत- चीन के युद्ध के दौरान देश की काफी क्षति हुई थी। भारत अभी तक उस क्षति से बाहर भी नहीं आ पाया था तभी 27 मई 1964 के दिन जवाहरलाल नेहरू जी का देहांत हो गया।

तब सदन के सबसे बड़े राजनीतिक दल कांग्रेस ने एक ईमानदार और साफ सुथरी छवि वाले वरिष्ठ नेता लाल बहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री पद के लिए अपना नेता चुना।

भारत-चीन के युद्ध के समय में हुई क्षति, नए प्रधानमंत्री और भारत में बढ़ती हुई खाद्य कीमतों को देखते हुए पाकिस्तान ने इस घटनाक्रम का फायदा उठाने की कोशिश की और सन् 1965 में भारत के साथ युद्ध की घोषणा कर दी। लाल बहादुर शास्त्री जी को अभी कुछ ही समय हुआ था प्रधानमंत्री पद संभाले हुए परन्तु प्रधानमंत्री जी ने अपनी पूर्ण कर्तव्य निष्ठा से अपने पद का कार्यभार संभाला
और भारतीय सेना को पूर्ण आजादी देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा करना आपको बेहतर आता है इसलिए आप हम लोगों को बताइए कि हम इस युद्ध में भारतीय सेना की किस प्रकार मदद कर सकते हैं।

इस युद्ध में पाकिस्तान की बुरी तरह हार हुई, भारतीय सेना ने पाकिस्तान की जमीन पर काफी अंदर तक के क्षेत्र पर अतिक्रमण कर लिया। लेकिन पाकिस्तान के कहने पर सोवियत संघ (रूस) और अमेरिका द्वारा की गई मिलीभगत ने युद्ध शांत करवा दिया। भारत- पाकिस्तान युद्ध के दौरान ही देश में अनाज का संकट भी पैदा हो गया जिससे देश में खाद्यान्न की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। तब अमेरिका ने कुछ शर्तों के साथ मदद की पेशकश की तब शास्त्री जी ने इस शर्तनुमा मदद को लेने से मना कर दिया और इस संकट से निपटने के लिए उन्होंने एक अलग उपाय किया।

लाल बहादुर शास्त्री जी ने पहले अपने पूरे परिवार को 1 दिन का उपवास रखवाया और उन्होंने देखा कि परिवार के किसी भी सदस्य को इस उपवास से कोई तकलीफ नहीं हुई और जब उन्हें इस बात पर पूर्ण भरोसा हो गया कि 1 दिन की भूख बर्दाश्त की जा सकती है तब ही उन्होंने पूरे देश से 1 दिन का उपवास का रखने का आह्वान किया। और भारत देश ने भी उनके इस भरोसे पर पूरा साथ दिया। और देश का हर नागरिक इस क्रांति में शामिल हो गया और 1 दिन का उपवास रखना शुरू कर दिया।

इसी दौरान लाल बहादुर शास्त्री जी ने जय जवान जय किसान का नारा दिया।
भारत-पाकिस्तान के युद्ध की समाप्ति के बाद सोवियत संघ ने समझौते के लिए दोनों देशों को ताशकंद बुलवाया। तब समझौते के दौरान कई सारी शर्तें रखी गई। लाल बहादुर शास्त्री जी को सभी शर्तें मंजूर थी सिवाय एक के। वो पाकिस्तान से जीती हुई जमीन वापिस नहीं देना चाहते थे लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाकर शास्त्री जी से समझौते पर हस्ताक्षर करवा लिए गए तब शास्त्री जी ने कहा था कि यह जमीन पाकिस्तान को कोई दूसरा प्रधानमंत्री ही लौटाएगा।

ताशकंद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर 11 जनवरी 1966 ( lal bahadur shastri death ) को हस्ताक्षर करने के कुछ देर बाद ही रात में संदिग्ध परिस्थिति में उनकी मृत्यु हो गई। अभी भी यह चर्चा का विषय है कि लाल बहादुर शास्त्री जी की मृत्यु हृदय-आघात या फिर जहर देने से हुई थी।

Lal Bahadur Shastri Quotes in Hindi

लाल बहादुर शास्त्री के सुविचार

लोगो को सच्चा लोकतंत्र और स्वराज कभी भी हिंसा से प्राप्त नहीं हो सकता है।

जय जवान जय किसान 

देश के प्रति निष्ठां सभी निष्ठाओं से पहले है।

जय जवान जय किसान 

हर काम की अपनी एक गरिमा है और उसे करने का संतोष भी अलग है।

अपने देश की आजादी की रक्षा करना केवल सैनिको का काम नहीं, बल्कि ये पुरे देश का कर्तव्य है।

हमारी ताकत और मजबूती के लिए जरूरी है सबमे एकता स्थापित करना 

हम सिर्फ अपने लिए ही नही बल्कि समस्त विश्व के लिए शांति और शांतिपूर्ण विकास मे विश्वास रखते है

यदि कोई एक व्यक्ति भी ऐसा रह गया जिसे किसी रूप मे अछूत कहा जाए. तो भारत को अपना सर शर्म से झुकाना पड़ेगा ।

मेरी समझ से प्रशासन का मूल विचार यह है कि समाज को एकजुट रखा जाये, ताकि वह विकास कर सके और अपने लक्ष्यो की तरफ बढ़ सके।

जो शासन करते है, उन्हे देखना चाहिए कि लोग प्रशासन पर किस तरह प्रतिक्रिया करते है, अंततः जनता ही मुखिया होती है

भ्रष्टाचार को पकड़ना बहुत कठिन है, लेकिन पूरे जोर के साथ कहता हूं, यदि हम इस समस्या से गंम्भीरता से नही निपटे तो हम अपने कर्तव्यो मे सफल नही है।

जो मनुष्य अपने मन का गुलाम बना रहता है वह नेता या प्रभावशाली पुरूष नही हो सकता

आर्थिक मुद्दे हमारे लिए सबसे जरूरी है, जिससे हम अपने सबसे बड़े दुश्मन गरीबी से लड़ सकते है ।

कानून का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि हमारे लोकतन्त्र की बुनियादी संरचना बरकरार रहे, और ये और भी मजबूत बने ।

हमें फिर से शांति के लिए पुरी हिम्मत और साहस से लड़ने की जरूरत है , जैसे की हम आक्रमणकता के खिलाफ लड़ थे ।

यदि पाकिस्तान का हमारे देश के किसी भी हिस्से को हड़पने का इरादा है, तो उसे नए सिरे से सोचना चाहिए, मै स्पष्ट रूप से कहता हूँ

अनुशासन और एकजुट कार्यवाही राष्ट्र की शक्ति का वास्तविक स्त्रोत है

 

लाल बहादुर शास्त्री की कविताए lal bahadur shastri

लाल बहादुर शास्त्री जयंती कविता हिंदी में Lal Bahadur Shastri Jayanti Kavita Hindi me

“गूंजे चारो ओर जय जवान जय किसान के नारे
जब आये लाल बहादुर शास्त्री प्यारे
भारत के थे वो दुसरे प्रधानमंत्री
माने जाते है देश की आजादी के मंत्री
जिसने देश के लिए बलिदान दिया
आज हम सब ने मिलकर उन्हें याद किया
पी लिया जहर देश की खातिर ना दगा दिया
अमर है वो जिसने सर्वस्व अपना लगा दिया
परम पूज्य लाल बहादुर शास्त्री जी अपने
कोटि-कोटि नमन भारत माँ इस वीर सपूत”
जय हिन्द, जय भारत

लाल बहादुर शास्त्री पर हिंदी कविता Lal Bahadur Shastri Hindi Kavita

छोटा कद महान व्यक्तित्व
और जिगर में स्वाभिमान
मंत्र अनोखा दिया राष्ट्र को
जय जवान जय किसान…..

सादगी की प्रतिमुरत तुम
और भौतिकता से अनजान
मंत्र अनोखा दिया राष्ट्र को
जय जवान जय किसान…..

सन पैंसठ की जंग हुई जो
घुटने में आया पाकिस्तान
मंत्र अनोखा दिया राष्ट्र को
जय जवान जय किसान……

भारत माँ के लाल नमन तुझे
नतमस्तक सारा हिंदुस्तान
मंत्र अनोखा दिया राष्ट्र को
जय जवान जय किसान…..

हिंदी कविता लाल बहादुर शास्त्री पर Hindi Poem on Lal Bahadur Shastri

लाल बहादुर शास्त्री प्रगति के अथक यात्री
एक सत्य थे एक कर्म थे
सत्य, निष्ठा, सादगी के मर्म थे
थे एक प्रतिबव्द प्रखर यात्री
लाल बहादुर शास्त्री
न प्रदर्शन न कोई दिखावा
कुछ भी तो नही छुपाया
सब में सक्रीय दिन या रात्रि
लालबहादुर शास्त्री
रहस्यमय देहावसान आकस्मिक
कुछ भी न चला पता वास्तविक
राजनीती के थे कुशल नेत्री
लाल बहादुर शास्त्री

लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर हिंदी कविता Poem on Lal Bahadur Shastri Jayanti

लाल बहादुर शास्त्री, भारत की शान
नारा दिया जय जवान जय किसान
फर्श से अर्श का सफ़र कहाँ था आसान
पर तुम कभी न हुए इन सबसे परेशान
काश ! वक्त से पूर्व तुम्हारी रहस्यमय मौत न होती
तो वर्तमान भारत की तकदीर संवर गई होती
तुमको नमन भारत के अनमोल लाल
तुम्हे पाकर भारत भूमि हुई निहाल

लाल बहादुर शास्त्री जी पर कविता Poem on Lal Bahadur Shastri in hindi

लालों में वह लाल बहादुर,
भारत माता का वह प्यारा !
कष्ट अनेकों सहकर जिसने,
निज जीवन का रूप संवारा !!
तपा तपा श्रम की ज्वाला में,
उस साधक ने अपना जीवन !
बना लिया सच्चे अर्थों में,
निर्मल तथा कांतिमय कुंदन !!
सच्चरित्र और त्याग-मूर्ति था,
नहीं चाहता था आडम्बर !
निर्धनता उसने देखी थी,
इसलिए दया दिखाता था निर्धनो पर !!
नहीं युद्ध से वो घबराता था,
विश्व-शांति का वह तो दीवाना !
इसी शांति की बलवेदी पर,
उसे ज्ञात था मर-मिट जाना !!

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